Sunday, June 14, 2020

नन्हा पौधा


एक बीज था गया बहुत ही गहराई में बोया
उसी बीज के अंतर में था नन्हा पौधा सोया

उस पौधे को मंद पवन ने जाकर पास जगाया
नन्ही – नन्ही बूंदों ने फिर उस पर जल बरसाया

सूरज बोला “प्यारे पौधे निद्रा दूर भगाओ
अलसाई आँखें खोलो तुम उठकर बाहर आओ”

आँख खोलकर नन्हे पौधे ने तब ली अंगड़ाई
एक अनोखी नई शक्ति सी उसके तन में आई

नींद छोड़ आलस्य त्याग कर पौधा बाहर आया
बाहर का संसार बड़ा ही अद्भुत उसने पाया

-वेंकटेश चन्द्र पाण्डे

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